भारतीय वायुसेना की 'सूर्यकिरण' टीम के 30 साल: आसमान में तिरंगा लहराने का गौरवशाली सफर

मुख्य बातें
- •भारतीय वायुसेना की 'सूर्यकिरण' टीम ने 1996 में स्थापना के बाद 30 साल पूरे किए हैं।
- •टीम ने अब तक 800 से अधिक एयर शो में हिस्सा लिया है और दुनिया की प्रमुख एरोबेटिक टीमों में शामिल है।
- •टीम के प्रदर्शनों में लाल-सफेद हॉक जेट्स और तिरंगे धुएं का विशेष आकर्षण रहता है।
- •टीम के पायलटों के कौशल और टीमवर्क ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
भारतीय वायुसेना की प्रमुख एरोबेटिक टीम 'सूर्यकिरण' ने इस साल अपने गठन के 30 साल पूरे किए हैं। वर्ष 1996 में स्थापित हुई यह टीम आज दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एरोबेटिक टीमों में शुमार है। सूर्यकिरण टीम अपने लाल-सफेद रंग के हॉक एडवांस्ड जेट विमानों और तिरंगे धुएं के प्रभावशाली करतबों के लिए विश्वभर में जानी जाती है। टीम ने अब तक 800 से अधिक एयर शो में हिस्सा लिया है, जो इसके अनुभव और कौशल का प्रमाण है।
सूर्यकिरण टीम की स्थापना वायुसेना के पायलटों द्वारा की गई थी, जिन्होंने अपने कौशल और समर्पण से इस टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। टीम में शामिल पायलट अपनी बेहतर फ्लाइंग तकनीकों और टीमवर्क के लिए जाने जाते हैं। सूर्यकिरण टीम ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपने प्रदर्शनों से दर्शकों का मनोरंजन किया है। टीम के प्रदर्शनों में विमानों का synchronized उड़ान भरना, तिरंगे के रंगों में धुआं छोड़ना और जटिल हवाई करतब शामिल हैं।
