कार खरीदते वक्त ध्यान रखें ये 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग कैसे मिलती है? जानिए पूरा प्रोसेस

मुख्य बातें
- •कारों की सेफ्टी रेटिंग फ्रंट, साइड और पोल क्रैश टेस्ट जैसे कठिन परीक्षणों के आधार पर तय की जाती है, जो वास्तविक दुर्घटनाओं जैसी स्थितियों को नकली रूप में दोहराते हैं।
- •आधुनिक सुरक्षा रेटिंग में एयरबैग, सीट बेल्ट, ADAS तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स जैसे मानकों को शामिल किया जाता है।
- •दुनिया भर में Global NCAP, Euro NCAP, ASEAN NCAP और भारत की Bharat NCAP जैसी एजेंसियां कारों की सुरक्षा रेटिंग प्रदान करती हैं, जिसमें Euro NCAP सबसे कठोर मानकों वाला माना जाता है।
- •स्टार रेटिंग वाली कारों में सुरक्षा सुविधाएं बेहतर होती हैं, जिससे दुर्घटनाओं के दौरान चोटों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
- •भारत में अब Bharat NCAP सक्रिय हो गया है, जो भारतीय सड़कों और दुर्घटना स्थितियों को ध्यान में रखकर टेस्ट करता है।
आज के समय में कार खरीदने वाले ग्राहकों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। पहले लोग सिर्फ माइलेज, डिजाइन और फीचर्स पर ध्यान देते थे, लेकिन अब सेफ्टी रेटिंग भी उनकी पहली पसंद बन गई है। पिछले कुछ वर्षों में हुए सड़क हादसों और क्रैश टेस्ट रिपोर्ट्स ने लोगों की सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अब ग्राहक ऐसी कारों को प्राथमिकता देने लगे हैं जिन्हें 4 या 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली हो। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह रेटिंग मिलती कैसे है? दरअसल, किसी भी कार को सेफ्टी रेटिंग देने से पहले उसे कई कठिन टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है, जो असल सड़क दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। इन टेस्टों के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि टक्कर के समय कार अंदर बैठे यात्रियों को कितनी सुरक्षा प्रदान करती है। इसी आधार पर कार को स्टार रेटिंग दी जाती है, जो उसकी सुरक्षा क्षमता को दर्शाती है।
