आठवें वेतन आयोग की पुणे बैठक में उठा बड़ा फैसला, न्यूनतम वेतन 65,000 रुपये तक बढ़ाने की संभावना
मुख्य बातें
- •पुणे में हुई आठवें वेतन आयोग की बैठक में न्यूनतम वेतन 65,000 रुपये प्रस्तावित किया गया।
- •पेंशन, डीए, भत्ते और ग्रेच्युटी में भी वृद्धि की संभावना पर चर्चा हुई।
- •बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतनमान को भी शामिल किया गया।
- •प्रस्ताव स्वीकृत होने पर लाखों कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
- •सरकार द्वारा जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
पुणे में आयोजित आठवें वेतन आयोग की बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भत्ते और ग्रेच्युटी में बड़े बदलावों पर चर्चा हुई है। इस बैठक में प्रस्ताव रखा गया है कि सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 65,000 रुपये प्रति माह तक किया जा सकता है। इसके अलावा, महंगाई भत्ते (डीए) में भी संशोधन किया जा सकता है, जिससे कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में पेंशन प्रणाली में सुधार और विभिन्न प्रकार के भत्तों (जैसे मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता) की दरों में वृद्धि पर भी विचार किया गया। ग्रेच्युटी की राशि को बढ़ाकर कर्मचारियों के लिए अधिक सुरक्षा प्रदान करने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में सरकार द्वारा इसे अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
वेतन आयोग के सदस्यों ने बताया कि इस बैठक में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और महंगाई के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों पर सहमति बनी है। बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतनमान को भी ध्यान में रखा गया, ताकि समानता बनाए रखी जा सके।
