राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को दी राहत देने से इनकार, आजीवन कारावास की सजा बरकरार
मुख्य बातें
- •राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 27 मई 2026 को आसाराम बापू की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।
- •आसाराम को तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया; उनकी अंतरिम जमानत 7 जुलाई 2026 तक थी।
- •दो अन्य आरोपियों शिल्पी और शरतचंद को बरी कर दिया गया, जबकि आसाराम की अपील खारिज हुई।
- •मामला अगस्त 2013 का है जब नाबालिग लड़की ने आश्रम में हुए दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी।
- •ट्रायल कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी ठहराया था; हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक सुनवाई चली।
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 27 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए गुरु आसाराम बापू को नाबालिग से यौन उत्पीड़न एवं दुष्कर्म के मामले में राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। अदालत ने आसाराम को तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश भी दिया है। फिलहाल आसाराम अंतरिम जमानत पर बाहर हैं, लेकिन उनकी जमानत की अवधि 7 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद उन्हें जल्द ही पुलिस हिरासत में सौंपना होगा।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट, जोधपुर द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। हालांकि, इसी मामले के दो अन्य सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को बरी कर दिया गया है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने इन दोनों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। आसाराम, शिल्पी और शरतचंद तीनों ने ही अपनी सजाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसमें से आसाराम की अपील खारिज कर दी गई, जबकि शिल्पी और शरतचंद को राहत मिली।




