आसाराम बापू को मिली बड़ी झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी, तुरंत सरेंडर का आदेश
मुख्य बातें
- •राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
- •तुरंत सरेंडर का आदेश दिया गया है, फिलहाल वे पैरोल पर हैं
- •शिल्पी और शरतचंद को बरी कर दिया गया, उनकी सजा निरस्त
- •मामला 2013 का है, पीड़िता नाबालिग थी, ट्रायल कोर्ट ने 2018 में सजा सुनाई थी
- •उच्च न्यायालय में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक चली थी सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 27 मई 2026 को आसाराम बापू को नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा। इसके साथ ही कोर्ट ने आसाराम बापू को तुरंत सरेंडर करने का आदेश भी दिया है। फिलहाल वे पैरोल पर बाहर हैं और उनकी अंतरिम जमानत की अवधि 7 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सजा से राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया गया है। दोनों आरोपियों को पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा 20-20 वर्ष की सजा सुनाई गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया।




