बकरी ईद पर जानें कि कुर्बानी किसे करनी है और कैसे करनी है

बकरी ईद एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल जुल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान हलाल जानवरों की कुर्बानी करते हैं और उसके गोश्त को बांटते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल होता है कि कुर्बानी किस पर जायज है और कैसे करनी है।
इसलिए, आइए जानते हैं कि कुर्बानी के नियम और शर्तें क्या हैं। सबसे पहले, कुर्बानी हर उस मुसलमान पर वाजिब है जो साहिब-ए-निसाब हो। साहिब-ए-निसाब यानी वो शख्स जिसके पास साढ़े बावन (52.5) तोला चांदी या साढ़े सात (7.5) तोला सोने के बराबर पैसा या जरूरत से ज़्यादा सामान/रकम हो।
अब सवाल है कि घर के हर कमाने वाले शख्स को अलग से कुर्बानी देनी होगी या नहीं। इसका जवाब है कि घर के एक जिम्मेदार शख्स की तरफ से की गई एक कुर्बानी पूरे घर वालों के लिए काफी है, चाहे उस घर में कितने ही कमाने वाले मेंबर क्यों न हों। अगर कोई शख्स जॉब करता है या कमाई करता है लेकिन वो साहिब-ए-निसाब नहीं है तो उसपर कुर्बानी जायज नहीं है। ऐसे में परिवार का कोई जिम्मेदार शख्स कुर्बानी करवा सकता है।
इसके अलावा, एक हदीस सुनन अत-तिर्मिज़ी और सुनन इब्न माजाह के मुताबिक़ बताई गई है कि हज़रत अबू अय्यूब अल-अंसारी (रज़ि.) से पूछा गया था कि अल्लाह के रसूल जमाने में कुर्बानी का क्या तरीका था। उन्होंने जवाब दिया, “एक आदमी अपनी और अपने घर वालों तरफ़ से एक बकरे की कुर्बानी देता था, फिर वे खुद भी खाते थे और दूसरों को भी खिलाते थे।” ये हदीस साफ तौर पर बताती है कि पैगंबर साहब की सुन्नत को पूरा करने के लिए एक घर की तरफ से एक जानवर की कुर्बानी काफी है।
इसलिए, बकरी ईद पर कुर्बानी करने से पहले इन नियमों और शर्तों को ध्यान में रखना आवश्यक है। कुर्बानी करने से पहले सुन्नत का पालन करना और परिवार के साथ मिलकर इस त्योहार को मनाना होगा।






