नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में सोमवार को हुए उच्च स्तरीय वार्ता में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने तथा आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाशने पर सहमति व्यक्त की। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य की रणनीति पर मुहर लगाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत की पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भारत संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है। मोदी ने बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया, जिससे आपसी लाभ और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिल सके। इस संदर्भ में दोनों देशों ने ‘कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ और ‘भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग’ जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमति जताई। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार के बीच व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
शिक्षा और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में भी साझेदारी को नई दिशा दी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि म्यांमार के छात्रों के लिए ‘मेकांग गंगा ICCR छात्रवृत्तियां’ 2026 से बढ़ाकर 100 कर दी जाएंगी। अभी तक यह संख्या 36 थी। यह फैसला दोनों देशों के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा युवा पीढ़ी को करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
व्यापार और वित्तीय लेन-देन को सुगम बनाने के लिए दोनों पक्ष ‘रुपया-क्यात निपटान तंत्र’ के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर सहमत हुए। इस व्यवस्था की शुरुआत मई 2024 में हुई थी, जिसके बाद से लेन-देन की मात्रा में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देशों ने कृषि-प्रसंस्करण, पेट्रोलियम, ऊर्जा और खनन जैसे क्षेत्रों में गहन सहयोग के लिए भी प्रतिबद्धता जताई। इसके अंतर्गत दोनों पक्ष अपने राष्ट्रीय कानूनों और नियमों के अनुसार निवेश तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे।
सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के मुद्दे पर भी गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की। साथ ही, दोनों पक्षों ने अपनी संप्रभु भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए नहीं होने देने पर सहमति व्यक्त की। म्यांमार के राष्ट्रपति ह्लाइंग ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को मंजूरी नहीं देगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि दोनों नेताओं की वार्ता व्यापक थी और इसमें शांति, प्रगति तथा समृद्धि की साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। उन्होंने बताया कि भारत म्यांमार का एक भरोसेमंद पड़ोसी है और संकट के समय में उसका पहला सहयोगी रहा है। मोदी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर नीति’ के अनुरूप भारत म्यांमार के विकास और सुरक्षा में निरंतर सहयोग करता रहेगा।