बिहार एआई शिखर सम्मेलन : भाषा की बाधा मिटाने से लेकर खेती तक में क्रांति लाने वाला एआई
मुख्य बातें
- •बिहार एआई शिखर सम्मेलन में भाषा की बाधाओं को दूर करने और कृषि क्षेत्र में एआई तकनीक के उपयोग पर चर्चा हुई।
- •बिहार भाषा अनुवाद मॉडल** का उद्घाटन किया गया, जो स्थानीय भाषाओं को राष्ट्रीय स्तर से जोड़ेगा।
- •कृषि एआई प्लेटफॉर्म** के माध्यम से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, फसल बीमारी की पहचान और उर्वरक प्रबंधन की जानकारी मिलेगी।
- •मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज के हर वर्ग तक एआई तकनीक के लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।
- •एआई तकनीक का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में भी किया जाएगा।
पटना स्थित राजधानी के बिहार एआई शिखर सम्मेलन में गुरुवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था भाषा की बाधाओं को दूर करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में एआई के सकारात्मक प्रभावों को प्रदर्शित करना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में राज्य सरकार, तकनीकी विशेषज्ञों, किसानों और उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
शिखर सम्मेलन के दौरान बिहार भाषा अनुवाद मॉडल का उद्घाटन किया गया, जो स्थानीय भाषाओं जैसे भोजपुरी, मगही और मैथिली को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का कार्य करेगा। इस मॉडल के माध्यम से लोगों को अपनी मातृभाषा में ही डिजिटल सेवाओं तक पहुंच मिल सकेगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचाना आसान होगा। तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि इस मॉडल के सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
