बेंगलुरु मेट्रो की पिंक-ब्लू लाइन पर संकट: पश्चिम बंगाल के 10 हजार मजदूरों के वापस न आने से अधूरा काम

मुख्य बातें
- •पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान 10 हजार से अधिक मजदूर बेंगलुरु मेट्रो परियोजना से गायब हो गए।
- •पिंक लाइन और ब्लू लाइन पर निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित, जून और दिसंबर की समय सीमा खतरे में।
- •स्थानीय निवासी और यात्री सरकार से मांग कर रहे हैं कि वैकल्पिक श्रमिकों की व्यवस्था शीघ्र की जाए।
- •BMRCL अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर मजदूरों को वापस लाने की कोशिश की जा रही है।
बेंगलुरु शहर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, मगर पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों का असर अब इन परियोजनाओं पर दिखाई देने लगा है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) द्वारा निर्माणाधीन पिंक लाइन और ब्लू लाइन पर मजदूरों की भारी कमी के कारण काम लगभग ठहर गया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के दौरान 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किए गए। चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए हजारों मजदूर अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल चले गए थे, मगर चुनाव के इतने दिन बीत जाने के बाद भी वे वापस बेंगलुरु नहीं लौटे हैं। इससे मेट्रो परियोजना में कार्यरत बड़ी संख्या में मजदूरों की कमी हो गई है, जिससे निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
BMRCL के अधिकारियों ने बताया कि पिंक लाइन और ब्लू लाइन परियोजनाओं पर श्रमिकों की कमी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। पिंक लाइन के अंतर्गत कलेना अग्रहारा से तवरेकेरे तक 6 एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जिसे जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसी तरह, ब्लू लाइन के अंतर्गत सिल्क बोर्ड से के.आर. पुरम तक लगभग 19.75 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को दिसंबर तक जनता के लिए खोलने की योजना थी। मगर मजदूरों की कमी के कारण अब दोनों परियोजनाओं की समय सीमा पर खतरा मंडरा रहा है। कई स्थानों पर स्टेशन निर्माण, ट्रैक बिछाने और अन्य तकनीकी कार्यों में काफी देरी हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि यदि शीघ्र वैकल्पिक श्रमिकों की व्यवस्था नहीं की गई, तो मेट्रो सेवा के उद्घाटन में और देरी हो सकती है।






