तापमान वृद्धि से घट रही फसलों की पैदावार, मेरठ के विशेषज्ञों ने सुझाए समाधान
मुख्य बातें
- •बढ़ते तापमान के कारण फसलों की पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक कमी आई है।
- •सहफसली खेती अपनाने और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई।
- •सरकार द्वारा चलाई जा रही सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान आधुनिक तकनीकों को अपना सकते हैं।
- •कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मेरठ, उत्तर प्रदेश – बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में किसानों को फसलों की घटती पैदावार का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सोमवार को मेरठ में एक विशेषज्ञ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे पैदावार में कमी आ रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र, मेरठ के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि तापमान वृद्धि के कारण गेहूं, धान और अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने कहा, "पिछले पांच वर्षों में औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जिसके कारण फसलों के विकास चक्र में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।" उन्होंने किसानों से सहफसली खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे एक ही खेत में एक से अधिक फसलें उगाई जा सकें। इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि भूमि की उर्वरता भी बनी रहेगी।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने बताया कि जल संकट और अनियमित वर्षा के कारण सिंचाई की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। इस पर डॉ. कुमार ने कहा, "सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग करना चाहिए। इससे पानी की बचत होती है और फसलों को समय पर पानी मिलता रहता है।" उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपना सकते हैं।
