नेपाल के बालेन शाह का भारत सीमा विवाद सुलझाने का प्लान फेल होता नजर आ रहा, ब्रिटेन और चीन दोनों ने ठुकराया मध्यस्थता प्रस्ताव

मुख्य बातें
- •नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन और चीन से मध्यस्थता की अपील की थी।
- •ब्रिटेन के राजदूत रॉब फेन ने स्पष्ट किया कि यह मामला भारत-नेपाल का द्विपक्षीय मुद्दा है और ब्रिटेन इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
- •चीन ने भी नेपाल के मध्यस्थता प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही भविष्य में कोई पहल की संभावना व्यक्त की गई है।
- •नेपाल खुद चीन पर अपने क्षेत्र में अतिक्रमण करने के आरोप लगाता रहा है, जो इस मामले को और जटिल बना देता है।
- •नेपाल की राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जबकि भारत ने द्विपक्षीय बातचीत का सुझाव दिया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए तैयार किए गए प्लान को बड़ा झटका लगा है। शाह ने हाल ही में संसद में यह जानकारी दी थी कि उन्होंने इस विवाद को निपटाने के लिए तीसरे देशों—ब्रिटेन और चीन—से मध्यस्थता की अपील की थी। हालांकि, ब्रिटेन और चीन दोनों ने ही इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिससे शाह का प्लान अधर में लटकता नजर आ रहा है।
ब्रिटेन ने नेपाल के प्रस्ताव को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। ब्रिटिश अखबार *द टेलीग्राफ* में प्रकाशित खबर के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री के सलाहकार ने ब्रिटेन के राजदूत रॉब फेन से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया था। नेपाल का तर्क था कि सुगौली संधि (1816) में ब्रिटेन एक पक्षकार रहा है, इसलिए इस मामले में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, राजदूत फेन ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय है और ब्रिटेन इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने कहा, *"यह भारत और नेपाल का द्विपक्षीय मामला है। इसमें ब्रिटेन नहीं पड़ेगा।"*
