लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब ने जमीन विवाद में हाईकोर्ट का रुख किया

मुख्य बातें
- •दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार के जमीन खाली करने के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
- •सरकार ने जमीन को सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए लीज समझौते की धारा-4 के आधार पर कब्जा लेने का आदेश दिया।
- •क्लब के पास लगभग 14,000 सदस्य और 500 कर्मचारी हैं, और इसका संचालन राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण द्वारा नियुक्त जनरल कमेटी कर रही है।
- •क्लब प्रबंधन ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की अपील की है।
नई दिल्ली – लुटियंस दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े जमीन विवाद का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। क्लब ने केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश को चुनौती देते हुए न्यायालय का सहारा लिया है। केंद्र सरकार ने क्लब को 27.3 एकड़ जमीन 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया था। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की और तत्काल सुनवाई की मांग की। न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई 26 मई, मंगलवार को करने पर सहमति जताई है।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 22 मई को क्लब को एक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में क्लब को 2, सफदरजंग रोड स्थित अपनी संपत्ति केंद्र सरकार को सौंपने का आदेश दिया गया था। सरकार ने अपने आदेश का आधार लीज समझौते की धारा-4 को बताया। इस धारा के अनुसार, सार्वजनिक उद्देश्य के लिए सरकार जमीन को दोबारा अपने कब्जे में ले सकती है। सरकार का तर्क है कि यह जमीन प्रधानमंत्री आवास और उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट स्थित है, इसलिए इसे रक्षा ढांचे को मजबूत करने, शासन संबंधी सुविधाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।






