दिल्ली जिमखाना क्लब के जमीन विवाद में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप, केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती

मुख्य बातें
- •दिल्ली जिमखाना क्लब के जमीन विवाद में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
- •केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती, 5 जून तक जमीन खाली करने का निर्देश
- •क्लब प्रबंधन ने सदस्यों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया
- •दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 3 जुलाई 1913 को हुई थी
- •क्लब के करीब 14 हजार सदस्य और उपयोगकर्ता हैं, जबकि 500 से अधिक कर्मचारी यहां कार्यरत हैं
लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े जमीन विवाद का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। क्लब ने केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें क्लब को लुटियंस दिल्ली स्थित अपनी 27.3 एकड़ की जमीन 5 जून तक खाली करने के लिए कहा गया है। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस अवनीश झिंगन के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 मई, मंगलवार को करने पर सहमति जताई है।
क्लब को 22 मई को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा नोटिस जारी किया गया था, जिसमें 2, सफदरजंग रोड स्थित उसकी संपत्ति केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने अपने आदेश में लीज समझौते की धारा-4 का हवाला दिया, जिसके तहत सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन दोबारा अपने कब्जे में ली जा सकती है। सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास और कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट स्थित यह जमीन रक्षा ढांचे को मजबूत करने, शासन संबंधी सुविधाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम कार्यों के लिए आवश्यक है।






