गंगा दशहरा 2024: जानिए कब है, क्यों मनाया जाता है और क्या है पौराणिक कथा

मुख्य बातें
- •गंगा दशहरा 2024 आज 14 जून को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि पर मनाया जा रहा है।
- •इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं, इसलिए गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
- •राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से मां गंगा धरती पर आईं, जिन्होंने भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित होकर पृथ्वी को स्पर्श किया।
- •गंगा दशहरा के दिन पूजा, दान और गंगा आरती करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।
आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्गलोक से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस पावन अवसर पर गंगा नदी में स्नान, पूजा-अर्चना और दान का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, मां गंगा का धरती पर अवतरण इतना सरल नहीं था। यह राजा भागीरथ की कठोर तपस्या और ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से ही संभव हो सका।
गंगा दशहरा की कथा राजा सागर और उनके वंशजों से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में राजा सागर नामक एक प्रतापी राजा थे जिन्होंने सातों समुद्रों को जीत लिया था। उनकी दो रानियां थीं—केसिनी और सुमति। केसिनी से एक पुत्र असमंजस था, जबकि सुमति के साठ हजार पुत्र थे। राजा सागर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन भगवान इंद्र ने यज्ञ के घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सागर के साठ हजार पुत्र घोड़े की खोज में कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे और घोड़े को देखकर कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपने तपोबल से सभी साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। उनकी आत्माएं शांत नहीं हुईं, जिससे राजा सागर के परिवार को गहरा दुख हुआ।
