असम मॉडल से समझिए: सुवेंदु अधिकारी ‘कैदखाना’ कैसा होगा, जहां रहेंगे घुसपैठिये?
मुख्य बातें
- •असम में चल रहे डिटेंशन सेंटरों का मॉडल केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘कैदखाने’ के लिए आधार होगा।
- •असम के केंद्रों में बंदियों को उनके देश वापस भेजने तक रखा जाता है, लेकिन कई मामलों में लंबे समय तक रहने के कारण मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की है।
- •केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे केंद्रों का उपयोग केवल उन्हीं लोगों के लिए किया जाए जिनकी नागरिकता पर वास्तव में संदेह हो।
- •असम मॉडल के अनुसार, बंदियों को नियमित कानूनी सहायता और परिवार से मिलने की अनुमति दी जाती है।
- •मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ऐसे केंद्रों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए भी किया जा सकता है, खासकर सीएए के संदर्भ में।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘कैदखाना’ जहां अवैध प्रवासी (घुसपैठिये) रखे जाएंगे, उसकी रूपरेखा असम में चल रहे विदेशी नागरिकों के लिए बनाए गए डिटेंशन सेंटरों के मॉडल पर आधारित होगी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने हाल ही में कहा है कि असम के अनुभव से सीखते हुए ऐसे केंद्रों का निर्माण किया जाएगा। लेकिन यह केंद्र असल में कैसा होगा? इसकी कार्यप्रणाली, नियम और चुनौतियां क्या होंगी, इसे समझने के लिए असम मॉडल को ही आधार बनाया जाएगा।
असम में वर्ष 2019 से अब तक छह डिटेंशन सेंटर चालू हैं, जहां विदेशी नागरिक अधिनियम (एफसीआरए) के तहत रखे गए लोगों को रखा जाता है। इन केंद्रों में बंदियों के रहने, खाने-पीने, चिकित्सा और कानूनी सहायता की व्यवस्था होती है। असम के मॉडल के अनुसार, इन केंद्रों में बंदियों को उनके देश वापस भेजने तक रखा जाता है। हालांकि, लंबे समय तक रहने के कारण मानवाधिकार संगठनों ने इन केंद्रों की आलोचना भी की है। कई बार ऐसी खबरें आईं कि बंदियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं या वे लंबे समय तक बिना मुकदमे के बंद हैं।
