गंगा दशहरा आज: जानिए पौराणिक कथा, तिथि, महत्व और पूजा विधि

मुख्य बातें
- •आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जा रहा है।
- •गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
- •राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए राजा भागीरथ ने कठोर तपस्या की और माता गंगा धरती पर आईं।
- •भगवान शिव ने गंगा के वेग को अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे धरती पर प्रवाहित किया।
- •इस दिन गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जिसे गंगा दशहरा के पावन पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता गंगा स्वर्गलोक से धरती पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 14 जून 2024 को पड़ रहा है। इस दिन गंगा नदी में स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।
गंगा दशहरा की कथा का संबंध राजा सगर और उनके वंशजों से है। प्राचीन काल में राजा सगर नामक प्रतापी राजा थे, जिन्होंने सातों समुद्रों को जीत लिया था। उनकी दो रानियां थीं—केशिनी और सुमति। रानी केशिनी से एक पुत्र असमंजस था, जबकि रानी सुमति के 60 हजार पुत्र थे। एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। मगर देवेंद्र ने यज्ञ के घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सगर के 60 हजार पुत्र घोड़े की खोज में कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे। वहां उन्हें घोड़ा दिखाई दिया, तो उन्होंने कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपने तपोबल से उन सभी 60 हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। उनकी आत्माएं मुक्त नहीं हो सकीं।
