गुजरात उच्च न्यायालय ने बस कर्मी की मृत्यु पर परिजनों को 6.52 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया
मुख्य बातें
- •गुजरात उच्च न्यायालय ने बस कर्मी की मृत्यु पर उसके परिजनों को 6.52 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
- •राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) की याचिका को खारिज कर अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
- •कर्मी की मृत्यु के लिए निगम की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया और मुआवजा अनिवार्य किया गया।
- •पहली बार निचली अदालत ने 5 लाख रुपये मुआवजा दिया था, जिसे उच्च न्यायालय ने बढ़ाकर 6.52 लाख कर दिया।
- •फैसले से सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और निगमों को अपनी नीतियों में सुधार करने का संदेश गया।
गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए बस कर्मी की मृत्यु पर उसके परिजनों को 6.52 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में सरकारी निगम की ओर से की गई अपील को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कर्मी की मृत्यु के लिए निगम की लापरवाही जिम्मेदार थी, जिसके परिणामस्वरूप मुआवजा देना अनिवार्य हो गया।
मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात उच्च न्यायालय ने जीएसआरटीसी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कर्मी की सेवा के दौरान हुई दुर्घटना में हुई मृत्यु के लिए निगम को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अदालत ने अपने आदेश में मुआवजे की राशि 6.52 लाख रुपये निर्धारित की, जो कर्मी के परिवार को शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी। न्यायालय ने यह भी सुनिश्चित किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगम द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएं।
