उच्च न्यायालय ने सात माह के गर्भ से पीड़ित 16 वर्षीय नाबालिग को गर्भपात की अनुमति दी
मुख्य बातें
- •वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार की घटना हुई, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई।
- •उच्च न्यायालय ने चिकित्सा रिपोर्ट्स के आधार पर गर्भपात की अनुमति दी।
- •पीड़िता के गर्भ में सात माह का भ्रूण था, जिसे चिकित्सा दृष्टि से हटाया जा सकता था।
- •न्यायालय ने पीड़िता के परिवार की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- •इस फैसले से पीड़िता को त्वरित न्याय मिला और उसे मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिली।
उत्तर प्रदेश के एक जिले की 16 वर्षीय किशोरी, जो गंभीर यौन हिंसा का शिकार हुई थी, को उच्च न्यायालय ने गर्भपात की अनुमति दे दी है। चिकित्सा रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता के गर्भ में सात माह का भ्रूण था। न्यायालय ने इस मामले में गर्भपात की स्वीकृति देते हुए उसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखा। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पीड़िता की ओर से दायर याचिका पर विचार किया और त्वरित न्याय सुनिश्चित करते हुए यह फैसला सुनाया।
स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि पीड़िता को गर्भपात कराने में कोई चिकित्सीय बाधा नहीं है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने पीड़िता के परिवार की सुरक्षा और गोपनीयता को भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों ने भी न्यायालय को आवश्यक जानकारी मुहैया कराई। न्यायालय ने इस मामले में पीड़िता के अधिकारों की रक्षा करते हुए उसे त्वरित न्याय प्रदान किया है।
