तेल संकट के बीच वेनेजुएला बना भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता, जानिए कैसे बदल रही है ऊर्जा रणनीति

मुख्य बातें
- •वेनेजुएला मई में भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बन गया, जो अप्रैल की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा है।
- •होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
- •अमेरिका चाहता है कि भारत वेनेजुएला और अमेरिकी तेल का अधिक आयात करे, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में नए संतुलन बने।
- •वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (303 अरब बैरल) है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उत्पादन प्रभावित रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराते संकट ने दुनिया भर के देशों की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर दिया है। इसी कठिन दौर में वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभरा है। हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बन गया है। ऊर्जा ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि अप्रैल की तुलना में मई में वेनेजुएला से भारत को होने वाला तेल आयात लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गया है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में आई कमी। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से आयात करता है। लेकिन वर्तमान में ईरान के आसपास चल रहे संघर्ष और समुद्री सुरक्षा संकट के कारण यह मार्ग असुरक्षित हो गया है। अप्रैल में भारत ने सात साल बाद ईरान से तेल आयात फिर से शुरू किया था, लेकिन अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी के कारण मई में कोई नया ईरानी तेल जहाज भारत नहीं पहुंच सका। इसके अलावा, सऊदी अरब से आने वाली तेल आपूर्ति भी तेजी से घट गई है। अप्रैल में जहां भारत को सऊदी अरब से प्रतिदिन लगभग 6.7 लाख बैरल तेल मिल रहा था, वहीं अब यह घटकर केवल 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।
