नालंदा विश्वविद्यालय: प्राचीन भारतीय ज्ञान से वैश्विक चुनौतियों का नया समाधान

मुख्य बातें
- •नालंदा विश्वविद्यालय रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन के माध्यम से विश्व शांति, कूटनीति और ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों पर शोध कर रहा है।
- •आईआरपीएस पाठ्यक्रम पश्चिमी सिद्धांतों से अलग भारतीय सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित है।
- •राम-सुग्रीव गठबंधन और भगवान कृष्ण की रणनीतियों को आधुनिक भू-राजनीति और सॉफ्ट पावर के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
- •बिहार की आहार-पायने जल प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए किया जा रहा है।
- •नालंदा विश्वविद्यालय की पहल भारत के सभ्यतागत मूल्यों को वैश्विक विमर्श का हिस्सा बना रही है।
नालंदा विश्वविद्यालय, जो प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा का प्रतीक है, आज के वैश्विक मुद्दों पर नई दृष्टि प्रस्तुत कर रहा है। इस विश्वविद्यालय में रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन जैसे ग्रंथों के माध्यम से विश्व शांति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, कूटनीति और ऊर्जा संकट जैसे विषयों पर गहन शोध किया जा रहा है। यह पहल पश्चिमी सिद्धांतों से हटकर भारतीय सभ्यतागत मूल्यों को वैश्विक विमर्श का हिस्सा बना रही है। विशेष रूप से, नालंदा का इंटरनेशनल रिलेशन एंड पीस स्टडीज (आईआरपीएस) नामक पाठ्यक्रम पारंपरिक पश्चिमी दृष्टिकोणों से अलग एक नया मार्ग अपनाता है।




