कैंची धाम स्थापना दिवस: बाबा नीम करोली के चमत्कारों और सेवा भाव की अनूठी कथा

मुख्य बातें
- •कैंची धाम आश्रम का स्थापना दिवस हर साल 15 जून को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन हनुमान जी और अन्य देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।
- •बाबा नीम करोली द्वारा जल को घी में बदलने की चमत्कारिक घटना आश्रम की प्रमुख मान्यताओं में शामिल है।
- •बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है और उनकी सेवा भावना के अनेक किस्से प्रसिद्ध हैं।
- •बाबा ने 10 सितंबर 1973 को महासमाधि ली थी, जिसके बाद उनके भक्तों ने 1974 में मंदिर निर्माण कराया।
- •स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भंडारे में शामिल होकर श्रद्धालु बाबा की कृपा प्राप्त करते हैं।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के निकट स्थित कैंची धाम आश्रम हर साल 15 जून को अपना स्थापना दिवस मनाता है। यह तिथि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन आश्रम में हनुमान जी सहित अन्य देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा अलग-अलग वर्षों में हुई थी। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि बाबा नीम करोली स्वयं इस भंडारे की देखरेख करते हैं। इसी क्रम में एक प्रमुख किंवदंती है जिसमें बाबा ने जल को घी में बदलकर श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त भोजन की व्यवस्था की थी।
किंवदंती के अनुसार, एक बार आश्रम में भंडारे का आयोजन किया गया था, लेकिन घी की कमी के कारण भोजन बनाने में कठिनाई हो रही थी। आयोजकों ने बाबा से सहायता मांगी। बाबा ने उन्हें शिप्रा नदी के तट से जल भरकर लाने का निर्देश दिया। आयोजकों ने वैसा ही किया। इसके बाद बाबा ने उस जल पर अपना दिव्य स्पर्श किया, जिसके परिणामस्वरूप वह जल घी में परिवर्तित हो गया। इस चमत्कारिक घटना के बाद तैयार किया गया भोजन सभी श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त हो गया। यह घटना बाबा की दिव्य शक्ति और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का प्रमाण मानी जाती है।
