कानपुर पुलिस बनाम आईटीबीपी: कमिश्नरेट पर 'घेराव' के दावे का पूरा सच क्या है?
मुख्य बातें
- •कानपुर पुलिस और आईटीबीपी के बीच हुए विवाद का मामला सोशल मीडिया पर अतिशयोक्ति से पेश किया गया।
- •आईटीबीपी अफसर कानपुर पुलिस के सहयोगी के रूप में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थे।
- •बीते 20 जून को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर आईटीबीपी की टीम तैनात की गई थी, जिसने कमिश्नरेट परिसर में प्रवेश नहीं किया।
- •पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आईटीबीपी अफसरों और पुलिस कर्मियों के बीच कोई विवाद नहीं हुआ था।
- •सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में आईटीबीपी अफसरों को पुलिस लाइन के बाहर गश्त करते देखा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल इंडो-तिब्बetan बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए विवाद का मामला अब सामने आ रहा है। बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कानपुर पुलिस द्वारा आईटीबीपी के अफसरों को 'कमिश्नरेट ऑफिस को घेरने' की कोशिश करने के आरोप लगाए जा रहे थे। हालांकि, अब इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आई है, जिसके अनुसार यह मामला अतिशयोक्ति से भरा हुआ प्रतीत होता है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में किसी भी प्रकार के 'घेराव' या अतिक्रमण की घटना नहीं हुई थी। आईटीबीपी के अफसर कानपुर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानपुर पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहे थे। बीते 20 जून को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर आईटीबीपी की एक टीम तैनात की गई थी, जो किसी विशेष घटना या सुरक्षा कारणों से वहां उपस्थित थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आईटीबीपी अफसरों ने कमिश्नरेट परिसर में प्रवेश नहीं किया और न ही किसी प्रकार का 'घेराव' किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में आईटीबीपी अफसरों को पुलिस लाइन के बाहर खड़े देखा जा सकता है, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त कर रहे थे।
