पानी की एक्सपायरी डेट को लेकर भ्रम? जानें कब तक है सुरक्षित और किन बातों का रखें ध्यान

मुख्य बातें
- •बोतलबंद पानी पर लिखी एक्सपायरी डेट वास्तव में पानी की नहीं, बल्कि प्लास्टिक बोतल की होती है
- •प्लास्टिक बोतलें छह महीने के बाद रसायन छोड़ने लगती हैं, जिससे पानी दूषित हो सकता है
- •बोतलबंद पानी को ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखने से उसकी सुरक्षा अवधि बढ़ सकती है
- •नदी, बोरवेल या टैंक के पानी की गुणवत्ता उसके संग्रहण और प्राकृतिक फिल्ट्रेशन पर निर्भर करती है
जल ही जीवन है—यह सिर्फ एक लोकोक्ति नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत सत्य है। पानी का रासायनिक सूत्र H2O होता है, जिसमें हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु शामिल होता है। मगर क्या कभी आपने सोचा है कि पानी की भी एक एक्सपायरी डेट होती है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता रहता है, खासकर तब जब बोतलबंद पानी की पैकेजिंग पर लिखी हुई तारीख दिखाई देती है। लेकिन क्या सच में पानी की कोई वास्तविक एक्सपायरी डेट होती है? जवाब है, नहीं।
बोतलबंद पानी पर दिखाई देने वाली ‘एक्सपायरी डेट’ असल में पानी की नहीं, बल्कि प्लास्टिक की बोतल की होती है। भारतीय मानकों के अनुसार, प्लास्टिक की बोतलें आमतौर पर अपने गुणों को बनाए रखने के लिए केवल छह महीने तक सुरक्षित रहती हैं। इसके बाद प्लास्टिक धीरे-धीरे रसायन छोड़ना शुरू कर देता है, जो पानी में मिलकर उसे दूषित कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छह महीने से पुरानी बोतलबंद पानी की बोतलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि, अगर बोतल को ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखा जाए तो उसकी सुरक्षा अवधि थोड़ी बढ़ सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्लास्टिक बोतल की गुणवत्ता और उसके रख-रखाव पर पानी की सुरक्षा निर्भर करती है।






