5 साल में 15 इंजीनियरों की टीम देख चुकी है 'लंगड़ा ब्रिज', मगर पकड़ में नहीं आया कोई दोषी
मुख्य बातें
- •बदायूं के 'लंगड़ा ब्रिज' का निर्माण 2019 में हुआ था, मगर निर्माण में हुई गड़बड़ियों के कारण यह कमजोर हो गया।
- •पिछले पांच सालों में 15 से अधिक इंजीनियर टीमों ने पुल की जांच की, मगर आज तक किसी दोषी की पहचान नहीं हुई।
- •ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ और कच्ची सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
- •स्थानीय विधायक ने इस मामले को उठाया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्थित एक विवादित पुल, जिसे स्थानीय लोग 'लंगड़ा ब्रिज' के नाम से पुकारते हैं, पिछले पांच वर्षों से एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। इस पुल के निर्माण और रखरखाव में शामिल 15 से अधिक इंजीनियरों की टीम ने इसे देखा है, लेकिन आज तक किसी भी दोषी या जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान नहीं की जा सकी है। यह मामला न केवल तकनीकी विफलता को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था की कमजोरियों पर भी सवाल उठाता है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह पुल 2019 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन निर्माण के दौरान हुई गड़बड़ियों के कारण यह जल्द ही कमजोर हो गया। पुल के टूटने और दरारों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिसके बाद जिला प्रशासन ने तकनीकी जांच के लिए इंजीनियरों की टीमों को लगाया। पिछले पांच वर्षों में कम से कम 15 बार नई टीमें गठित की गईं, लेकिन हर बार रिपोर्ट में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन में खामियों या रखरखाव की कमी का जिक्र किया गया, मगर दोषियों की पहचान नहीं हो सकी।
