ईरान का बड़ा फैसला: क्या अमेरिका को सौंप रहा है अपना संवर्धित यूरेनियम? जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों उठ रहे सवाल

मुख्य बातें
- •ईरान संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने को तैयार है, जिससे आर्थिक प्रतिबंध हटाने और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की उम्मीद है।
- •विशेषज्ञ इसे अमेरिका के ‘लीबिया मॉडल’ का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें पहले हथियार सौंपे जाते हैं और बाद में देश पर हमला कर दिया जाता है।
- •लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी ने 2003 में अपना परमाणु कार्यक्रम अमेरिका को सौंपा था, लेकिन 2011 में उनका तख्तापलट कर दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
- •इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ वही नीति अपनानी चाहिए जो लीबिया के साथ अपनाई गई थी।
पूरी दुनिया में एक बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा हो रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि ईरान अमेरिका को अपना संवर्धित यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार हो गया है। इस कदम के पीछे ईरान की मंशा आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, अरबों डॉलर की संपत्ति अनलॉक करना और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करना है। हालांकि, इस फैसले पर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की एक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसे ‘लीबिया मॉडल’ कहा जा रहा है। आखिर क्या है यह मॉडल और क्यों ईरान के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है?
‘लीबिया मॉडल’ का इतिहास साल 2003 की बात है, जब लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी ने अमेरिका पर भरोसा करते हुए अपना पूरा परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका को सौंप दिया था। गद्दाफी को लगा था कि इससे उनके देश को बचाया जा सकेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें स्वीकार्यता मिलेगी। लेकिन सिर्फ आठ साल बाद, 2011 में अमेरिका और नाटो ने लीबिया पर हमला कर दिया। गद्दाफी का तख्तापलट हुआ और उनकी हत्या कर दी गई। उनके करीबी आज तक इस फैसले को उनकी सबसे बड़ी भूल मानते हैं। फिलिस्तीन के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भी कहा था कि गद्दाफी द्वारा परमाणु कार्यक्रम बंद करना उनकी जीवन की सबसे बड़ी भूल थी।
