नेहरू को 'पंडित' क्यों कहा गया? इतिहासकार पुष्पेश पंत ने दिए चौंकाने वाले जवाब

मुख्य बातें
- •इतिहासकार पुष्पेश पंत ने नेहरू को 'पंडित' कहे जाने पर कहा कि यह शब्द उन पर थोड़ा थोपा गया है।
- •पंत ने बताया कि नेहरू का राजनीति में प्रवेश पैराशूट से नहीं हुआ था, उन्होंने स्वयं संघर्ष किया।
- •नेहरू के पुरखों के मुसलमान होने की अफवाह का खंडन करते हुए पुष्पेश पंत ने कहा कि उनके परिवार के पुरखे मुसलमान नहीं थे।
- •कपड़े पेरिस में धुलने जाने के मिथक को पुष्पेश पंत ने 'पेरिस लॉन्ड्री' नामक इलाहाबाद की लॉन्ड्री से जोड़ा।
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर हमेशा से तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं। उनके जीवन, राजनीति और व्यक्तित्व पर अनेक बहसें होती रही हैं। हाल ही में इतिहासकार पुष्पेश पंत ने टीवी9 भारतवर्ष के एक विशेष पॉडकास्ट में इन सवालों पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने नेहरू के जीवन से जुड़े कई मिथकों और धारणाओं को तोड़ते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य प्रस्तुत किए हैं।
पुष्पेश पंत ने सबसे पहले नेहरू के 'पंडित' शब्द से जुड़े सवाल पर अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें 'पंडित' शब्द बिल्कुल भी उचित नहीं लगता। उनका कहना है कि बचपन से ही उन्हें 'चाचा नेहरू' के नाम से जाना जाता था। पंत ने बताया कि 'पंडित' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर विद्वानों या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत जैसे नेताओं के लिए किया जाता था। उन्होंने कहा कि नेहरू को 'पंडित' कहकर संबोधित करने वाले बहुत कम लोग थे। उनके समकालीन उन्हें 'जवाहर' कहकर ही बुलाते थे। सुभाष चंद्र बोस, कृपलानी और सरोजिनी नायडू जैसे नेताओं ने भी उन्हें 'जवाहर' ही कहा। पंत का मानना है कि 'पंडित' शब्द नेहरू पर थोड़ा थोपा गया है।






