लखनऊ: बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच बिजली संयंत्रों की क्षमता बढ़ाना होगा जरूरी
मुख्य बातें
- •उत्तर प्रदेश में ऊर्जा मांग में पिछले पांच वर्षों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- •राज्य सरकार ने वर्ष 2024 तक 50,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
- •विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने से पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा लागत में कमी आएगी।
- •सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश — राज्य में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए बिजली संयंत्रों की क्षमता बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास और शहरीकरण के कारण ऊर्जा की खपत में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसके चलते बिजली उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि करनी होगी। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में पिछले पांच वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर राज्य के बिजली ग्रिड पर पड़ रहा है, जिससे कई बार लोड शेडिंग की नौबत भी आ जाती है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024 तक 50,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार सौर ऊर्जा, थर्मल पावर और जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। साथ ही, निजी क्षेत्र को भी बिजली उत्पादन में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा लागत में भी कमी आएगी।
