अमेरिका बना भारतीय मखाने का सबसे बड़ा खरीदार, जानिए क्यों बढ़ रही है इसकी वैश्विक मांग

मुख्य बातें
- •अमेरिका भारतीय मखाने का सबसे बड़ा आयातक है, जो कुल निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है।
- •अमेरिका में कम कैलोरी, ग्लूटेन-फ्री और प्लांट-बेस्ड डाइट के चलन के कारण मखाने की मांग बढ़ी है।
- •बिहार के मिथिला क्षेत्र में मखाने की खेती की लंबी परंपरा है और यहां से देश के कुल उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा आता है।
- •भारत सरकार ने मखाना बोर्ड की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य मखाने के उत्पादन और निर्यात को संगठित करना है।
भारतीय मखाना अब सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा। यह एक पौष्टिक सुपरफूड बन चुका है, जिसकी वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में भारत सरकार ने मखाना बोर्ड की स्थापना की है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस फसल के उत्पादन और निर्यात को संगठित करना है। पिछले कुछ वर्षों में मखाने की खपत देश-विदेश दोनों जगहों पर बढ़ी है, लेकिन अमेरिका भारतीय मखाने का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है। आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले मखाने का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका खरीदता है। इस बढ़ती मांग के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
पहला प्रमुख कारण है अमेरिका में कम कैलोरी वाले और स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स की बढ़ती मांग। मखाना भुना हुआ खाया जाता है और यह लाइट स्नैक की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, अमेरिका में ग्लूटेन-फ्री और प्लांट-बेस्ड डाइट का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। मखाना इन दोनों श्रेणियों में आसानी से फिट बैठता है। इसके अलावा, अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासियों की संख्या भी काफी है, जो पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों की तलाश में रहते हैं। अमेरिका में स्नैकिंग कल्चर भी बहुत प्रचलित है, जहां लोग जल्दी-जल्दी खाने वाले उत्पादों को पसंद करते हैं। रोस्टेड और फ्लेवर्ड मखाने इन जरूरतों को पूरा करते हैं।
