गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए 'हीट स्ट्रेस' कितना खतरनाक? जानिए बचाव के तरीके

मुख्य बातें
- •भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को हीट स्ट्रेस का खतरा अधिक होता है।
- •हीट स्ट्रेस के कारण शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- •गर्भवती महिलाओं को दिन के सबसे गर्म समय में घर के अंदर रहने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।
- •नवजात शिशुओं को सीधी धूप से बचाना चाहिए और उन्हें नियमित रूप से स्तनपान करवाना चाहिए।
- •यदि किसी को गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
देशभर में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी का कहर जारी है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए यह स्थिति काफी खतरनाक साबित हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक और हीट स्ट्रेस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो मां और बच्चे दोनों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।
हीट स्ट्रेस का मतलब है शरीर का अत्यधिक गर्मी के कारण सामान्य से अधिक गर्म हो जाना। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है। ऐसे में उच्च तापमान के कारण उन्हें निर्जलीकरण, चक्कर आना, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नवजात शिशुओं के लिए भी यह स्थिति काफी खतरनाक होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता।
