मुंबई में गैर-मराठी रिक्शा-टैक्सी चालकों को व्यावहारिक मराठी सीखना अनिवार्य
मुख्य बातें
- •मुंबई महानगरपालिका द्वारा गैर-मराठी रिक्शा एवं टैक्सी चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है।
- •चालकों को 30 घंटे का पाठ्यक्रम पूरा करना होगा, जिसमें रोजमर्रा के संवाद सिखाए जाएंगे।
- •पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद चालकों को प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवश्यक होगा।
- •नियम का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और स्थानीय भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- •नियम का पालन न करने वालों पर लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
मुंबई महानगरपालिका ने एक नया नियम लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत शहर में चलने वाले रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा के बुनियादी व्यावहारिक शब्द सीखना अनिवार्य होगा। यह नियम विशेष रूप से उन चालकों के लिए लागू होगा जो मराठी भाषा नहीं बोलते। शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और स्थानीय यात्रियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
नियम के अनुसार, सभी गैर-मराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों को 30 घंटे का व्यावहारिक मराठी पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। इस पाठ्यक्रम में रोजमर्रा के संवाद, जैसे कि यात्रियों से बातचीत, पता पूछना, किराया बताना और आपातकालीन स्थितियों में संवाद करने के तरीके सिखाए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद चालकों को एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिसे उनके वाहन चलाने के लाइसेंस के साथ जोड़ा जाएगा। बिना प्रमाणपत्र वाले चालकों को लाइसेंस नवीनीकरण में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

