ईरान-अमेरिका वार्ता में फंसे 12 अरब डॉलर: कतर में रखे गए धन की रिहाई को लेकर बना विवाद

मुख्य बातें
- •ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता में फंसे 12 अरब डॉलर (लगभग 11.45 लाख करोड़ रुपये) की रिहाई को पहली शर्त बना दिया है।
- •ईरान चाहता है कि शुरुआती समझौते (MoU) के पहले चरण में ही उसे धनराशि तक पहुंच मिले, जबकि अमेरिका इसे अंतिम परमाणु समझौते से जोड़ रहा है।
- •अप्रैल 2024 में रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 6 अरब डॉलर की रिहाई पर सहमत हुआ था, जिसे 2023 में कैदियों की अदला-बदली के बाद कतर में रखा गया था।
- •ईरान का कहना है कि उसे धनराशि का उपयोग करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जबकि अमेरिका इसे मानवीय जरूरतों तक सीमित रखना चाहता है।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। इस बार सबसे बड़ा मुद्दा बना है कतर में रखे गए ईरान के फंसे हुए 12 अरब डॉलर (लगभग 11.45 लाख करोड़ रुपये)। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसे यह धनराशि नहीं मिल जाती, तब तक वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, किसी सूत्र ने बताया है कि कतर में रखे गए ये 12 अरब डॉलर ईरान की पहली और सबसे सख्त शर्त बन चुके हैं।
ईरान चाहता है कि अमेरिका के साथ शुरुआती समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग - MoU) के पहले चरण में ही उसे इस धनराशि तक पूरी पहुंच मिले। सूत्रों के अनुसार, यह राशि सिर्फ शुरुआती कदम है। ईरान का कहना है कि दुनिया भर में उसकी जितनी भी संपत्तियां और फंड्स फ्रीज किए गए हैं, उन्हें अंतिम समझौते के तहत पूरी तरह से रिलीज किया जाना चाहिए। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम न्यूज ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच बनने वाले संभावित समझौते की कुछ शर्तों पर अभी भी विवाद बना हुआ है।
