भारतीय मिडिल डिस्टेंस धाविका केएम दीक्षा डोपिंग मामले में फंसने से राष्ट्रीय रिकॉर्ड और कॉमनवेल्थ गेम्स की उम्मीदों पर लगा तगड़ा झटका

मुख्य बातें
- •केएम दीक्षा ने 2025 में 1500 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था, जिसमें उन्होंने 4:04.78 मिनट का समय निकाला था।
- •उनके डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल पाया गया है, जो वाडा द्वारा प्रतिबंधित सूची में शामिल है।
- •अगर दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें चार साल के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है, जिससे उनके कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा लेने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं।
- •भारतीय खेलों में डोपिंग का मुद्दा बार-बार उठता रहा है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।
भारतीय एथलेटिक्स के क्षेत्र में एक बार फिर बड़ी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर 1500 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक मिडिल डिस्टेंस रनर केएम दीक्षा पर डोपिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इससे न केवल उनके करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, बल्कि भारत की ओर से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनके प्रदर्शन की उम्मीदें भी धूमिल हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, दीक्षा के डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल की मौजूदगी पाई गई है, जो विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में शामिल है।
ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, दीक्षा को उनके सैंपल में स्टैनोजोलोल की उपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी गई है। स्टैनोजोलोल एक एनाबॉलिक स्टेरॉयड है, जिसे मांसपेशियों की वृद्धि और प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, वर्तमान में दीक्षा पर कोई अस्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन अगर दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इससे पहले ही उनके ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा लेने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं, जो भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ा झटका है।



