‘रामायण’ के मेघनाद बने विजय अरोड़ा: फिल्मी करियर से संघर्ष तक, टीवी धारावाहिक ने दिलाई पहचान

मुख्य बातें
- •विजय अरोड़ा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1972 में फिल्म ‘जरूरत’ से की थी, जिसमें उन्होंने जरीना वहाब के साथ लीड रोल निभाया था।
- •और 80 के दशक में वे बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया, जैसे ‘यादों की बारात’।
- •उन्हें ‘रामायण’ में मेघनाद की भूमिका मिलने के बाद घर-घर में पहचान मिली, और उनके अभिनय को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया।
- •विजय अरोड़ा का व्यक्तिगत जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन ‘रामायण’ ने उन्हें एक नई पहचान और सफलता दिलाई।
भारतीय टेलीविजन जगत में रामानंद सागर की महाकाव्यात्मक धारावाहिक ‘रामायण’ आज भी लोगों की स्मृतियों में अमर है। इस सीरियल के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है, और इनमें से एक प्रमुख नाम है मेघनाद का, जिसे दिवंगत अभिनेता विजय अरोड़ा ने जीवंत किया था। विजय अरोड़ा की गंभीर अभिनय शैली और प्रभावशाली स्क्रीन उपस्थिति ने इस किरदार को इतना खास बना दिया कि आज भी लोग उन्हें ‘रामायण’ के मेघनाद के रूप में याद करते हैं। हालांकि, उनके फिल्मी सफर की शुरुआत संघर्षों और उतार-चढ़ावों से भरी रही।
विजय अरोड़ा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1972 में आई फिल्म ‘जरूरत’ से की थी। इस फिल्म में उन्होंने जरीना वहाब के साथ लीड रोल निभाया था। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड की कई प्रमुख फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘यादों की बारात’ (1973) शामिल है, जिसमें उनके रोल को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया। इस फिल्म में उनकी भूमिका ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी। उनके करियर का यह दौर काफी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उन्होंने उस समय की कई बड़ी एक्ट्रेसेस के साथ काम किया, जिनमें परवीन बॉबी, मौसमी चटर्जी, जया भादुड़ी और वहीदा रहमान जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, उन्हें वह स्टारडम हासिल नहीं हुआ जिसकी उन्हें उम्मीदी थी। वक्त के साथ ही उन्हें फिल्मों में लीड रोल मिलना कम हो गया, और उन्हें साइड रोल करने पड़े।






