हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने प्रयाग नारायण मिश्र को दिया 'संस्कृतमहामहोपाध्याय' का सम्मान
मुख्य बातें
- •हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज ने संस्कृत विद्वान प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र को ‘संस्कृतमहामहोपाध्याय’ उपाधि से सम्मानित किया।
- •सम्मान समारोह में सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार सिंह और सचिव डॉ. रमेश चंद्र तिवारी ने उनके योगदान की सराहना की।
- •प्रो. मिश्र का जन्म 1945 में प्रयागराज में हुआ था और उन्होंने बीएचयू से संस्कृत में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
- •उनके प्रमुख लेखन में ‘संस्कृत साहित्य का इतिहास’, ‘पाणिनि व्याकरण’ और ‘वेदों का वैज्ञानिक अध्ययन’ शामिल हैं।
- •यह सम्मान संस्कृत जगत में अतुलनीय योगदान के लिए दिया जाता है।
प्रयागराज स्थित हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने संस्कृत के विख्यात विद्वान प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र को ‘संस्कृतमहामहोपाध्याय’ की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें प्रयागराज स्थित भार्गव सदन में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया। इस दौरान संस्कृत साहित्य, भाषा विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया गया।
सम्मान समारोह में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि प्रो. मिश्र संस्कृत अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित हस्ती हैं। उन्होंने कहा, "प्रो. मिश्र ने न केवल संस्कृत साहित्य को समृद्ध किया है, बल्कि उन्होंने अपने शिक्षण और लेखन से लाखों लोगों को संस्कृत से जोड़ा है।" इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यह उपाधि केवल उन्हीं विद्वानों को दी जाती है, जिनका योगदान संस्कृत जगत में अद्वितीय माना जाता है।




