पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठ रहे बग़ावती सुर, क्या महाराष्ट्र मॉडल दोहराने की तैयारी?

मुख्य बातें
- •पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर फूट की आशंका बढ़ रही है, जिसमें करीब 50 विधायक अलग होने की तैयारी में हैं।
- •पार्टी ने दो विधायकों को हस्ताक्षर विवाद के कारण निष्कासित कर दिया, जिसके बाद महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर विभाजन की चर्चा शुरू हुई।
- •ममता बनर्जी ने बीजेपी पर विधायकों को डराने-धमकाने और पैसे का लालच देने का आरोप लगाया है।
- •पिछले सप्ताह कालीघाट में हुई बैठक में 60 विधायक शामिल नहीं हुए थे, जबकि कुछ विधायक रथिन घोष के घर पर इकट्ठा हुए थे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर तनाव बढ़ता जा रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके बेटे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खबरों के अनुसार, टीएमसी के भीतर एक नई पार्टी बनाने की चर्चा जोरों पर है, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी शामिल नहीं होंगे। यह चर्चा तब शुरू हुई जब पार्टी ने दो विधायकों, ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा को हस्ताक्षर विवाद को लेकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में निष्कासित कर दिया।
इसके बाद कई लोगों ने महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति पैदा होने की आशंका व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि करीब 50 विधायक तृणमूल पार्टी से अलग होने की तैयारी में हैं। इन विधायकों में से कुछ ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।






