पश्चिम एशिया संकट से सूरत के टेक्सटाइल निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ीं, शिपिंग लागत चार गुना तक पहुंची
मुख्य बातें
- •पश्चिम एशिया संकट के कारण सूरत के टेक्सटाइल निर्यातकों की शिपिंग लागत में 400% तक वृद्धि हुई है।
- •लाल सागर मार्ग पर व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां लंबे मार्गों का उपयोग कर रही हैं, जिससे लागत और समय दोनों में वृद्धि हुई है।
- •छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है, जिनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।
- •स्थानीय व्यापार संगठनों ने सरकार से शिपिंग सब्सिडी और वैकल्पिक समाधानों की मांग की है।
सूरत, गुजरात के प्रमुख टेक्सटाइल निर्यातकों को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में हुए आकलनों के अनुसार, शिपिंग की लागत में आश्चर्यजनक रूप से 400 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे निर्यातकों की लागत बढ़ गई है और उनके मुनाफे पर गहरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय उद्योगपतियों ने बताया कि इस संकट के कारण माल ढुलाई के लिए उपलब्ध जहाजों की कमी हो गई है। इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और बीमा लागतों में बढ़ोतरी के कारण कुल शिपिंग व्यय में भारी बढ़ोतरी हुई है। एक प्रमुख निर्यातक ने बताया कि पहले जहां शिपिंग की लागत प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर हुआ करती थी, वहीं अब यह बढ़कर 8,000 से 10,000 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है, जिन्हें अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में मुश्किलें आ रही हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण लाल सागर मार्ग से होने वाले माल परिवहन में व्यवधान उत्पन्न हुआ है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग का उपयोग करना बंद कर दिया है और अब वे लंबे मार्गों जैसे केप ऑफ गुड होप का रुख कर रही हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि परिवहन लागत में भी कई गुना वृद्धि हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में सुधार होने में कम से कम छह महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।
