पूजा-पाठ के नियम: खड़े होकर पूजा करना सही है या नहीं, जानें शास्त्रों की बात

मुख्य बातें
- •पूजा-पाठ करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
- •शास्त्रों में बताए नियम के अनुसार, घर पर पूजा पाठ बैठकर ही किया जाना चाहिए।
- •जहां पूजा पाठ किया जाए वह जगह पूजा-मंदिर से ऊंची नहीं होनी चाहिए।
- •पूजा पाठ दौरान अपना आसन भगवान के आसन से ऊंचा नहीं रखना चाहिए।
- •पूजा के समय मुख पूर्व की ओर रखना चाहिए और धूप, दीप, घंटी और अगरबत्ती जैसी पूजन सामग्रियों को दाईं ओर रखना चाहिए।
पूजा-पाठ का महत्व हिंदू धर्म शास्त्रों में विशेष रूप से बताया गया है। पूजा-पाठ करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। लेकिन शास्त्रों में पूजा पाठ के दौरान विशेष सावधानियां और नियमों का पालन करने की बात कही गई है, क्योंकि बिना नियम से किया गया पूजा पाठ सफल नहीं होता। कई घरों में जगह का अभाव होता है, इसलिए लोग पूजा का मंदिर दीवार पर सेट करवा देते हैं और खड़े होकर पूजा पाठ करने के लिए बाध्य हो जाते हैं।
शास्त्रों में बताए नियम के अनुसार, घर पर पूजा पाठ बैठकर ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जहां पूजा पाठ किया जाए वह जगह पूजा-मंदिर से ऊंची नहीं होनी चाहिए। साथ ही, पूजा पाठ दौरान अपना आसन भगवान के आसन से ऊंचा नहीं रखना चाहिए। ऐसा करना पूजा पाठ के नियम के खिलाफ है। आसन पर बैठकर ही पूजा फलदायी होती है, दैनिक पूजा पाठ में आसन का विशेष महत्व माना गया है। पूजा घर में आसन पर बैठकर ही पूजा पाठ किया जाना चाहिए, इससे पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है।
