मुजफ्फरपुर: सरकारी कागज़ों में मर गईं, लेकिन ज़िंदा हैं बुजुर्ग महिला; अधिकारियों ने ठुकराया सबूत

मुख्य बातें
- •मुजफ्फरपुर की 70 वर्षीय सुशीला देवी का सरकारी रिकॉर्ड में 2020 में मृत्यु दर्ज कर दी गई थी, जबकि वह जीवित हैं।
- •सुशीला के पुत्र ने जमीन के पट्टे के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा, जो उनके पास नहीं था।
- •राजस्व विभाग ने रिकॉर्ड में सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रक्रिया में समय लग सकता है।
- •इस घटना ने सरकारी विभागों की लापरवाही और आम नागरिकों के प्रति उनके रवैये पर सवाल उठाए हैं।
मुजफ्फरपुर जिले की एक 70 वर्षीय महिला के साथ सरकारी कागज़ों में एक ऐसा हादसा हुआ है, जिसने उनकी ज़िंदगी को मुश्किल में डाल दिया है। महिला का नाम सुशीला देवी (परिवार वाले उन्हें ‘सुशीला’ के नाम से ही जानते हैं) है। उनका सरकारी रिकॉर्ड में नाम तो दर्ज है, लेकिन उनकी मृत्यु की तारीख 2020 लिख दी गई है। जबकि सुशीला आज भी ज़िंदा हैं और अपने परिवार के साथ रह रही हैं। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की लापरवाही को उजागर किया है।
सुशीला देवी मुजफ्फरपुर के मुड़ौल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की निवासी हैं। उनके पुत्र रामजीवन सिंह ने बताया कि जब उन्होंने अपनी मां के नाम पर जमीन का पट्टा बनवाने के लिए आवेदन किया, तो अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके रिकॉर्ड में सुशीला की मृत्यु हो चुकी है। रामजीवन ने बताया, “हमने अधिकारियों को बताया कि मेरी मां ज़िंदा हैं और हमने उन्हें दिखाया भी, लेकिन फिर भी उन्होंने कहा कि जब तक हम मृत्यु का प्रमाण पत्र नहीं दिखाएंगे, तब तक कोई काम नहीं होगा।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे पास मृत्यु प्रमाण पत्र कहां से आएगा जब मां जीवित हैं?”






