इंदौर छावनी में सड़क निर्माण के नाम पर ढहाए गए घर, पीढ़ियों की यादों पर तार-तार हुआ आक्रोश
मुख्य बातें
- •इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए करीब 50 घर गिराए गए।
- •स्थानीय निवासी दावा कर रहे हैं कि उनके पास जमीन के वैधानिक कागजात हैं।
- •प्रशासन का कहना है कि जमीन सरकारी थी और अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की गई।
- •निवासियों को मुआवजा देने से इनकार किया गया है, जिससे पूरे मोहल्ले में आक्रोश।
इंदौर के ऐतिहासिक छावनी क्षेत्र में सड़क निर्माण के नाम पर कई दशों पुराने घरों को तोड़ दिया गया है। स्थानीय निवासी इसे अपने घरों पर हुए अतिक्रमण के बजाय अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्ति बता रहे हैं। इस कदम से न केवल परिवारों की पीढ़ियों की यादें मिट गई हैं, बल्कि पूरे मोहल्ले में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
स्थानीय निवासी मोहल्ला निवासी मोहनलाल शर्मा ने बताया कि उनके परिवार का यह घर तीन पीढ़ियों से चल रहा था। उन्होंने कहा, "यह घर अतिक्रमण नहीं था, बल्कि हमारा वैधानिक मालिकाना हक था। प्रशासन ने बिना कोई नोटिस दिए ही घर गिरा दिए।" उन्होंने बताया कि प्रशासन ने उन्हें किसी भी प्रकार का मुआवजा देने से भी इनकार कर दिया है।
छावनी क्षेत्र में करीब 50 घरों को तोड़ने का काम किया गया है। प्रशासन का कहना है कि ये जमीन सरकारी थी और अतिक्रमण हटाने के लिए ही यह कार्रवाई की गई। हालांकि, स्थानीय निवासी इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास जमीन के कागजात मौजूद हैं और वे कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
स्थानीय पत्रकार राकेश मिश्रा ने बताया कि प्रशासन द्वारा किए गए इस कार्य में स्थानीय पुलिस ने भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, "यह एकतरफा कार्रवाई थी जिसमें आम लोगों के घरों को बिना किसी पूर्व सूचना के गिरा दिया गया।" उन्होंने बताया कि प्रशासन ने किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सुनवाई या लोगों की आपत्ति को दरकिनार कर दिया।
