नई शिक्षा नीति पर शिक्षकों की नाराजगी: बिना विचार-विमर्श लागू किए जाने का विरोध, आंदोलन तेज करने की धमकी
मुख्य बातें
- •शिक्षकों ने नई शिक्षा नीति को बिना संवाद लागू किए जाने का विरोध किया है।
- •शिक्षकों का कहना है कि आठ घंटे की कार्य अवधि उनकी रचनात्मकता और शिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित करेगी।
- •शिक्षक संगठनों ने सरकार से नीति में संशोधन और शिक्षकों की मांगों को पूरा करने की अपील की है।
- •शिक्षकों ने आने वाले दिनों में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
देशभर के शिक्षकों ने केंद्र सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को बिना किसी व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के लागू किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस नीति को लागू करने से पहले शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से पर्याप्त परामर्श नहीं लिया गया, जिसके कारण शिक्षा क्षेत्र में कई नवीनतम बदलावों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कई राज्यों के शिक्षकों ने शुक्रवार को आयोजित बैठकों में इस नीति के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
प्रमुख शिक्षक संगठनों में शामिल अखिल भारतीय शिक्षण मंच (एआईटीएम) और राष्ट्रीय शिक्षक संघ (एनटीएस) ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षकों की कार्य अवधि को आठ घंटे प्रतिदिन तक सीमित करने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे। शिक्षकों का तर्क है कि शिक्षण एक सर्जनात्मक प्रक्रिया है, जिसमें अतिरिक्त समय और तैयारी की आवश्यकता होती है। आठ घंटे की सीमा तय करने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
