नेपाल के पीएम बालेन शाह के बयान से भड़का सीमा विवाद, जानिए भारत-नेपाल संबंधों में कहां खड़ा है चीन

मुख्य बातें
- •नेपाल के पीएम बालेन शाह ने भारत के साथ सीमा विवाद में ब्रिटेन और चीन को शामिल करने की मांग की है।
- •भारत और नेपाल के बीच मुख्य विवाद कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है।
- •सुगौली संधि (1816) के बाद से चले आ रहे इस विवाद में चीन की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
- •विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह के बयान से भारत-नेपाल संबंधों पर असर पड़ सकता है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को फिर से हवा दे दी है। शाह ने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की जमीनों पर कब्जा किया हुआ है और इस विवाद के समाधान में ब्रिटेन तथा चीन को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और नेपाल के बीच भूमि विवाद का मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है, जिसमें मुख्य रूप से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्र शामिल हैं।
बालेन शाह का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने ब्रिटेन और चीन जैसे तीसरे पक्षों को मध्यस्थता का सुझाव दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सुझाव से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। नेपाल में हाल ही में राजनीतिक उठापटक के बाद शाह की सरकार बनी है, और उनके इस बयान से उनके प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठने लगे हैं।






