बेंगलुरु जेल से खूंखार कैदी की रिहाई का मामला: फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश का खुलासा, जेल प्रशासन पर सवाल

मुख्य बातें
- •बेंगलुरु सेंट्रल जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे खूंखार कैदी एम. शिवकुमार की रिहाई का मामला सामने आया है।
- •कैदी को रिहा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी आदेश इस्तेमाल किया गया।
- •जेल प्रशासन ने बिना पर्याप्त सत्यापन के इस फर्जी आदेश के आधार पर कैदी को रिहा कर दिया।
- •इस घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं।
बेंगलुरु की सेंट्रल जेल से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे एक खूंखार कैदी को रिहा कर दिया गया, लेकिन रिहाई का आधार सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी आदेश था। इस घटना ने पूरे जेल प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कैदी की पहचान एम. शिवकुमार के रूप में हुई है, जो हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जेल अधिकारियों को शिवकुमार की रिहाई के लिए एक आदेश मिला, जो हूबहू सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश जैसा लग रहा था। इस आदेश में कैदी की रिहाई का निर्देश दिया गया था। जेल प्रशासन ने बिना किसी विशेष सत्यापन के, इस आदेश को सच मान लिया और कैदी को रिहा कर दिया।
