भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई बहस: 500 अरब डॉलर के प्रस्तावित सौदे को लेकर उठे सवाल

मुख्य बातें
- •अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के व्यापार समझौते पर दावा किया है कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामान खरीदेगा।
- •ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था खत्म हो गई है, जिससे समझौते का आधार बदल गया है।
- •अमेरिका द्वारा सभी आयात पर समान 10% टैरिफ लगाने के फैसले से भारत को मिलने वाला विशेष लाभ समाप्त हो जाएगा, जिससे समझौते का महत्व कम हो सकता है।
- •जीटीआरआई ने चिंता व्यक्त की है कि रुपये में आई 12% गिरावट और महंगे आयात के कारण भारत का व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के व्यापार और खरीद समझौते को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में भारत दौरे के दौरान इस समझौते पर दावा किया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामान खरीदेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए बताया कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह खरीद मुख्य रूप से ऊर्जा, तकनीक और कृषि क्षेत्रों पर केंद्रित होगी।
