उद्योगों को एसटीपी जल के उपयोग एवं संरक्षण के लिए निर्देश जारी
मुख्य बातें
- •सरकार ने उद्योगों को एसटीपी जल के उपयोग एवं संरक्षण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
- •उद्योगों को अपने एसटीपी संयंत्रों से प्राप्त जल का न्यूनतम 50% अपने कारखानों में उपयोग करना होगा।
- •उद्योगों को वर्ष 2025 तक अपने जल उपयोग में 20% की कमी लाने के लक्ष्य को पूरा करना होगा।
- •निर्देशों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों के खिलाफ पर्यावरणीय कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- •इस कदम का उद्देश्य भूजल दोहन को कम करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
भारत सरकार ने औद्योगिक इकाइयों के लिए उपचारित अपशिष्ट जल (एसटीपी जल) के उपयोग और जल संरक्षण को अनिवार्य कर दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, सभी उद्योगों को अब अपने परिसरों में एसटीपी संयंत्र स्थापित करने होंगे और इस जल का उपयोग उत्पादन प्रक्रियाओं में करना होगा। यह कदम जल संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा भूजल दोहन को कम करने की दिशा में उठाया गया है।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि उद्योगों को अपने एसटीपी संयंत्रों से प्राप्त जल का न्यूनतम 50% उपयोग अपने कारखानों में अनिवार्य रूप से करना होगा। इसके अतिरिक्त, उद्योगों को वर्ष 2025 तक अपने जल उपयोग में 20% की कमी लाने के लक्ष्य को भी पूरा करना होगा। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों के खिलाफ पर्यावरणीय कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
