राजस्थान में तेजी से घट रही ऊंटों की संख्या, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा: जानिए पूरा सच

मुख्य बातें
- •राजस्थान में वर्ष 2012 से 2019 के बीच ऊंटों की संख्या 3.26 लाख से घटकर 2.13 लाख रह गई है।
- •सरकार द्वारा ऊंट को राज्य पशु घोषित करने और कई योजनाओं के बावजूद ऊंटपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा।
- •ऊंटनी के दूध की मांग में वृद्धि हुई है, जो 80 रुपये प्रति लीटर से लेकर 150 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है।
- •ऊंट की ऊन से बने हस्तशिल्प उत्पाद पर्यटकों में लोकप्रिय हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है।
राजस्थान की रेगिस्तानी धरती पर सदियों से ऊंटों ने परिवहन, खेती और संस्कृति को सहारा दिया है। लेकिन आज यह राज्य पशु बनने के बावजूद विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुका है। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2014 में ऊंट को राज्य पशु घोषित किया था और उसके बाद 2015 में राजस्थान ऊंट अधिनियम लागू किया गया, जिसका उद्देश्य ऊंटों के अवैध व्यापार और वध को रोकना था। इसके अलावा, सरकार ने उष्ट्र संरक्षण योजना भी शुरू की, जिसके तहत ऊंट के बच्चे (टोडिया) के जन्म पर ऊंटपालकों को दो किस्तों में कुल 20 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। साथ ही, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत सड़क दुर्घटना या अन्य कारणों से ऊंट की मौत होने पर 40 हजार रुपये तक का बीमा कवर भी प्रदान किया जाता है। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद ऊंटों की संख्या में लगातार गिरावट जारी है।






