गैस सिलेंडर तो बिक रहा, मगर डीएसी के लिए भटक रहे हैं उपभोक्ता!
मुख्य बातें
- •डीएसी (डिस्ट्रीब्यूटर अथॉराइजेशन सर्टिफिकेट) की कमी के कारण नए एलपीजी कनेक्शन लेने में हो रही परेशानी।
- •विक्रेता सिलेंडर तो बेच रहे हैं, मगर नए ग्राहकों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहा।
- •सरकारी योजनाओं जैसे 'हर घर गैस' पर उठ रहे सवाल।
- •डीएसी जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के प्रयास जारी।
देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर तो आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, मगर डीएसी (डिस्ट्रीब्यूटर अथॉराइजेशन सर्टिफिकेट) की कमी के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई शिकायतों के अनुसार, कुछ विक्रेता सिलेंडर तो बेच रहे हैं, लेकिन डीएसी के अभाव में नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को काफी भटकना पड़ रहा है। इससे न केवल नए ग्राहकों को निराशा मिल रही है, बल्कि एलपीजी वितरण प्रणाली में भी असमानता उत्पन्न हो रही है।
डीएसी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो एलपीजी वितरकों को ग्राहकों को नया कनेक्शन देने की अनुमति प्रदान करता है। इसके बिना कोई भी विक्रेता नया कनेक्शन जारी नहीं कर सकता। सूत्रों के अनुसार, कुछ राज्यों में डीएसी की कमी के कारण विक्रेता पुराने ग्राहकों को ही सेवा प्रदान कर रहे हैं, जबकि नए ग्राहकों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है और सरकार की 'हर घर गैस' जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें सिलेंडर तो मिल जाता है, लेकिन नया कनेक्शन लेने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई बार अधिकारियों द्वारा डीएसी जारी करने में देरी की जाती है, जिससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि डीएसी जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, मगर अभी तक पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाई है।
