उत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त, अब प्रशासक की भूमिका में जारी रखेंगे कार्य

मुख्य बातें
- •उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2024 को समाप्त हुआ।
- •मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने की मंजूरी दी।
- •पहली बार ग्राम पंचायतों में प्रशासक समिति का गठन किया जाएगा।
- •पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण संबंधी अस्पष्टता के कारण स्थगित किए गए हैं।
- •अगले विधानसभा चुनाव के पश्चात ही पंचायत चुनाव आयोजित किए जाने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों का निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल 25 मई 2024 को समाप्त हो गया है। हालांकि, राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू करते हुए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इससे जहां एक ओर ग्राम विकास के कार्यों में continuity बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तावित इस व्यवस्था को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूरी प्रदान कर दी है। सोमवार शाम तक संबंधित सरकारी आदेश जारी किए जाने की संभावना है। यह पहली बार होगा जब राज्य में ग्राम पंचायतों में प्रशासक समिति का गठन किया जाएगा। इससे पूर्व ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में एडीओ पंचायत अथवा सचिव को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, जिसके साथ ही ग्राम प्रधानों के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार समाप्त कर दिए जाते थे। किंतु इस बार सरकार ने अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति प्रदान की है।






