13 भाई-बहनों में पहली महिला न्यायाधीश: जस्टिस वी. मोहना की प्रेरणादायी कहानी

मुख्य बातें
- •जस्टिस वी. मोहना 13 भाई-बहनों में पहली महिला न्यायाधीश हैं
- •उन्होंने विल्लुपुरम सरकारी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की
- •सीधे वकील से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने वाली पहली महिला न्यायाधीश बनीं
- •में मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुईं
- •उनकी सफलता संघर्षमय और प्रेरणादायी कहानी है
तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले से आने वाली जस्टिस वी. मोहना ने न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल कायम की है। उनका परिवार 13 भाई-बहनों का है, और इसी परिवार में वे पहली महिला हैं जिन्होंने कानून के क्षेत्र में शीर्ष पद हासिल किया है। उनकी यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने सीधे वकील से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने का सफर तय किया है। हाल ही में उनकी इस उपलब्धि को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जब उन्होंने अपने लॉ कॉलेज के पहले बैच से कानून की पढ़ाई पूरी की और आज देश के सर्वोच्च न्यायालय में पहुंची हैं।
जस्टिस मोहना की कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सपनों को पूरा करने से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने विल्लुपुरम सरकारी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की, जो उनके करियर का पहला कदम था। उनके इस कॉलेज में उनके पहले बैच में शामिल होने की बात भी काफी चर्चित रही, क्योंकि उनके परिवार में किसी ने भी इससे पहले कानून की पढ़ाई नहीं की थी। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें न केवल लॉ कॉलेज में बल्कि बाद में तमिलनाडु राज्य न्यायिक सेवा में भी सफलता दिलाई।



