सुप्रीम कोर्ट ने 1983 के बिहार हत्याकांड में दोषियों की सजा बरकरार रखी
मुख्य बातें
- •में बिहार के सीवान जिले में जातीय तनाव के कारण पांच लोगों की हत्या हुई थी
- •निचली अदालत ने आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी जिसे उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया
- •सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और आरोपियों की सजा को स्वीकार किया
- •मामले में कुल 12 आरोपियों में से सात को पहले ही बरी कर दिया गया था, जबकि चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2024 – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को 1983 में बिहार के सीवान जिले में पांच लोगों की हत्या के मामले में दोषियों की सजा को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को भी स्वीकार किया, जिसमें दोषियों को मृत्युदंड से आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसले में कोई गलती नहीं पाई गई है।
इस घटना की शुरुआत 1983 में बिहार के सीवान जिले के एक गांव में हुई थी, जब जातीय तनाव के कारण पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने बाद में मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से कई को निचली अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन सजाओं को आजीवन कारावास में बदल दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की सजा को बरकरार रखा है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सबूतों से साफ है कि आरोपियों ने जानबूझकर हत्या की थी। हालांकि, न्यायालय ने मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास को उचित माना, क्योंकि मामला काफी पुराना हो चुका है और आरोपियों ने लंबे समय तक जेल में गुजारा किया है। इस फैसले से पीड़ित परिवारों को थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन वे अभी भी न्याय के पूर्ण होने की मांग कर रहे हैं।



