ईरान-कुवैत संघर्ष: जानिए क्यों निशाना बना अमेरिकी ठिकाने, क्या है पूरा मामला?

मुख्य बातें
- •ईरान ने पिछले 72 घंटों में कुवैत पर दो बड़े हमले किए, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ।
- •कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 13,000 से अधिक है, जो ईरान के निशाने पर हैं।
- •ईरान ने पहले यूएई पर 2,400 हमले किए थे, लेकिन अब कुवैत को निशाना बना रहा है।
- •अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि बातचीत जारी है।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते 72 घंटों में ईरान ने कुवैत पर दो बड़े हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति के बावजूद यह हमला हुआ है। कुवैत की सेना का कहना है कि ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान का दावा है कि यह हमला अमेरिका के खिलाफ बदला लेने के लिए किया गया है। इस पूरे मामले की गहराई में जाने से पहले समझिए कि आखिर ईरान कुवैत को ही क्यों निशाना बना रहा है, जबकि पहले यूएई उसकी मुख्य मार का शिकार रहा है।
####क्यों निशाना बना कुवैत? ईरान ने लंबे समय तक अमेरिका के सहयोगी देश यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) पर लगभग 2,400 हमले किए थे। हालांकि, अब उसने अपना निशाना बदलकर कुवैत को बना लिया है। इसका प्रमुख कारण कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की अहमियत है। कुवैत फारस की खाड़ी के किनारे स्थित है और ईरान के बेहद करीब है। यहां अमेरिका के तीन प्रमुख सैन्य अड्डे हैं: कैंप अरिफिजान, कैंप बुहिरिंग और अल सलेम एयरबेस। ‘द हिल’ की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 13,000 से अधिक है। ऐसे में ईरान के लिए कुवैत अमेरिका के खिलाफ अपनी प्रतिशोध की कार्रवाई का प्रमुख केंद्र बन गया है।






